फ्यूचर्स और फॉरवर्ड में अंतर समझें
मानकीकरण, क्लियरिंग, दैनिक मार्क-टू-मार्केट, मार्जिन, सेटलमेंट और बचे हुए जोखिमों के आधार पर फ्यूचर्स तथा फॉरवर्ड अनुबंधों की तुलना करें
सीधा जवाब
फ्यूचर्स और फॉरवर्ड भविष्य की कीमत तय करते हैं, लेकिन नकद और क्रेडिट ढांचा अलग है। फ्यूचर्स मानकीकृत, क्लियर और रोज़ सेटल होते हैं। फॉरवर्ड निजी द्विपक्षीय समझौता है, जिसकी मात्रा, जमानत और सेटलमेंट दस्तावेज़ तय करते हैं। उनकी शर्तें और जोखिम-साझेदारी अलग हो सकती हैं।
अनुबंध का ढांचा जोखिम की प्रकृति बदलता है
फ्यूचर्स में इकाई, कॉन्ट्रैक्ट माह, न्यूनतम मूल्य-परिवर्तन, सेटलमेंट और डिलीवरी के नियम पहले से तय होते हैं। भागीदार उपलब्ध श्रृंखलाओं में से अनुबंध चुनता है; हर आर्थिक शर्त पर अलग से बातचीत नहीं करता।
फॉरवर्ड को किसी खास तारीख, मात्रा, गुणवत्ता, स्थान या निपटान पद्धति के लिए ढाला जा सकता है। यह किसी व्यावसायिक जोखिम से बेहतर मेल खा सकता है, लेकिन अनुबंध की अदला-बदली कम आसान होती है और नियंत्रण दोनों पक्षों के संबंध पर निर्भर रहते हैं।
सिर्फ नाम से यह तय नहीं होता कि बचाव उपयुक्त है। मात्रा, संदर्भ कीमत, परिपक्वता, सेटलमेंट तरीका और कानूनी शर्तों को उस जोखिम से मिलाइए जिसे घटाना है।
अनुबंध विनिर्देश पढ़ने की जाँच सूची इसी मिलान का आरंभिक रिकॉर्ड बनाती है।
दैनिक मार्क-टू-मार्केट नकदी का समय बदलता है
फ्यूचर्स में आधिकारिक सेटलमेंट मूल्य से रोज़ लाभ-हानि निकलती है। घाटे वाली स्थिति को समाप्ति से पहले वेरिएशन मार्जिन देना पड़ सकता है, जबकि लाभ वाली स्थिति को उसी प्रक्रिया में रकम मिल सकती है।
काल्पनिक उदाहरण में, एक शॉर्ट फ्यूचर्स की आर्थिक इकाई 1,000 हो और कीमत 100 से 104 हो जाए। यदि पूरा चार-बिंदु परिवर्तन लागू है, तो 4,000 की प्रतिकूल दैनिक नकदी मांग बन सकती है।
भौतिक माल बाद में बिकने पर भी यह मांग पहले आ सकती है।
फॉरवर्ड में भी जमानत मांग हो सकती है, खासकर जब क्रेडिट-सपोर्ट समझौता हो। मूल्यांकन, सीमा, जमानत और क्लोज-आउट की शर्तें द्विपक्षीय दस्तावेज़ से आती हैं।
फ्यूचर्स मार्जिन और लेवरेज बताता है कि जमानत स्थिति की खरीद कीमत या अधिकतम नुकसान नहीं है।
क्लियरिंग एक जोखिम घटाती है, बाकी नहीं मिटाती
केंद्रीय क्लियरिंग और मार्जिनिंग का उद्देश्य क्लियर किए गए फ्यूचर्स में प्रतिपक्ष-प्रदर्शन जोखिम को संभालना है। इससे बाजार जोखिम, तरलता जोखिम, बेसिस जोखिम या गलत मेल वाले हेज का जोखिम समाप्त नहीं होता।
दूर के महीने में एक्सचेंज अनुबंध कम तरल हो सकता है, या उसका गुणक, डिलीवरी स्थान अथवा गुणवत्ता वास्तविक जोखिम से अलग हो सकती है। क्लियरिंग अनुकूल निकास मूल्य की गारंटी नहीं है।
फॉरवर्ड में प्रतिपक्ष का क्रेडिट, जमानत विवाद और क्लोज-आउट प्रावधान अलग से महत्त्व रखते हैं। इसलिए मूल्य-परिवर्तन के साथ यह भी दर्ज करें कि वादा कौन निभाएगा और विवाद होने पर अनुबंध कैसे बंद होगा।
सेटलमेंट और हेज को पूरे नकद-प्रवाह की तरह देखें
कुछ अनुबंध नकद सेटल होते हैं और कुछ में भौतिक डिलीवरी का रास्ता होता है। अनुबंध का नाम अंतिम भुगतान, डिलीवरी स्थान, नोटिस प्रक्रिया या अंतिम ट्रेडिंग समय नहीं बताता।
नकद-सेटल और भौतिक-डिलीवरी फ्यूचर्स में यह अंतर अलग से समझाया गया है।
नीचे की सूची हर तुलना में रखें:
- एक्सपोज़र की तारीख, मात्रा और संदर्भ कीमत
- कॉन्ट्रैक्ट माह, गुणक, सेटलमेंट और डिलीवरी नियम
- बेसिस का व्यवहार, उपलब्ध तरलता और क्लोज-आउट प्रक्रिया
- रोज़ की मार्जिन क्षमता तथा द्विपक्षीय जमानत की शर्तें
आम सवाल
क्या फ्यूचर्स हमेशा फॉरवर्ड से सुरक्षित होते हैं?
फ्यूचर्स में सामान्यतः केंद्रीय क्लियरिंग और दैनिक मार्जिनिंग होती है, जो प्रतिपक्ष जोखिम की संरचना बदलती है। बाजार, तरलता, बेसिस और परिचालन जोखिम फिर भी रहते हैं; इसलिए हर स्थिति में एक को सुरक्षित कहना सही नहीं है।
क्या फ्यूचर्स का लाभ केवल समाप्ति पर मिलता है?
नहीं। फ्यूचर्स आम तौर पर रोज़ मार्क-टू-मार्केट होते हैं, इसलिए अंतिम समाप्ति से पहले भी नियमों के अनुसार लाभ और हानि का नकद निपटान होता है।
क्या फॉरवर्ड में भी मार्जिन कॉल आ सकती है?
हाँ। द्विपक्षीय फॉरवर्ड में जमानत की शर्त हो सकती है। उसकी सीमा, मूल्यांकन, समय और क्लोज-आउट नियम एक्सचेंज फ्यूचर्स जैसे होने जरूरी नहीं हैं।